अगर आप प्राइवेट नौकरी करते हैं, स्टार्टअप में काम कर रहे हैं, कॉन्ट्रैक्ट पर हैं या एचआर प्रोफेशनल हैं, तो New Labour Code आपके लिए समझना बेहद जरूरी है। सरकार ने 29 पुराने श्रम कानूनों को मिलाकर 4 बड़े कोड बना दिए हैं, ताकि नियम सरल हों, पारदर्शिता बढ़े और कर्मचारियों को बेहतर सामाजिक सुरक्षा मिल सके। लेकिन इन बदलावों का आपकी सैलरी और नौकरी पर क्या असर होगा? आइए इसे आसान भाषा में समझते हैं।
आखिर क्या है New Labour Code?
भारत सरकार ने 29 पुराने श्रम कानूनों को मिलाकर 4 बड़े कोड बनाए हैं—
- वेतन संहिता (Code on Wages)
- औद्योगिक संबंध संहिता (Industrial Relations Code)
- सामाजिक सुरक्षा संहिता (Social Security Code)
- व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य एवं कार्य स्थितियां संहिता (OSH Code)
इनका उद्देश्य श्रम कानूनों को सरल बनाना और देशभर में एक समान नियम लागू करना है।
इन कोड्स को संसद ने 2019 और 2020 में पास किया था। अब राज्यों द्वारा नियम तय करने की प्रक्रिया के बाद इन्हें पूरी तरह लागू किया जाना है।
इन चारों कोड्स ने 29 अलग-अलग श्रम कानूनों की जगह ली है। उद्देश्य है—नियमों को एक जैसा बनाना, रजिस्ट्रेशन और फाइलिंग प्रक्रिया को आसान करना और कर्मचारियों के अधिकारों को स्पष्ट करना।
1. Code on Wages: सैलरी स्ट्रक्चर में सबसे बड़ा बदलाव
New Labour Code का सबसे चर्चित हिस्सा वेतन से जुड़ा है। नए नियम के अनुसार, आपकी कुल सैलरी (CTC) का कम से कम 50% हिस्सा बेसिक पे होना चाहिए। पहले कंपनियां बेसिक कम और भत्ते (HRA, स्पेशल अलाउंस आदि) ज्यादा रखती थीं, जिससे पीएफ और ग्रेचुटी कम बनती थी।
अब अगर भत्ते 50% से ज्यादा होंगे, तो अतिरिक्त हिस्सा बेसिक में जोड़ा जाएगा। इसका मतलब यह है कि आपका PF योगदान बढ़ सकता है। नतीजा—इन
हैंड सैलरी थोड़ी कम दिख सकती है, लेकिन रिटायरमेंट फंड और ग्रेचुटी ज्यादा मजबूत होगी।
साथ ही, केंद्र सरकार एक “फ्लोर वेज” तय करेगी, जिससे कोई भी राज्य न्यूनतम वेतन इससे कम नहीं रख सकेगा। इससे देशभर में मजदूरों के लिए एक न्यूनतम सुरक्षा सुनिश्चित होगी।
2. Industrial Relations Code: छंटनी और हड़ताल के नियम
इस कोड के तहत 300 तक कर्मचारियों वाली कंपनियों को छंटनी या यूनिट बंद करने के लिए सरकार से अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं होगी। पहले यह सीमा 100 कर्मचारियों तक थी। इससे कंपनियों को लचीलापन मिलेगा, लेकिन कर्मचारियों में जॉब सिक्योरिटी को लेकर चिंता भी हो सकती है।
हड़ताल के नियम भी सख्त हुए हैं। किसी भी स्ट्राइक से पहले 14 दिन का नोटिस देना अनिवार्य होगा। बिना नोटिस की हड़ताल अवैध मानी जा सकती है।
3. Social Security Code: PF, ESI और गिग वर्कर्स के लिए बड़ी राहत
यह कोड कर्मचारियों की सामाजिक सुरक्षा से जुड़ा है। PF, ESI, ग्रेचुटी, मैटरनिटी बेनिफिट्स और गिग वर्कर्स को इसमें शामिल किया गया है।
सबसे बड़ा बदलाव यह है कि फिक्स्ड टर्म कर्मचारियों को भी ग्रेचुटी का अधिकार मिलेगा। पहले ग्रेचुटी के लिए 5 साल की सेवा जरूरी थी, लेकिन अब तय अवधि (फिक्स्ड टर्म) वाले कर्मचारियों को एक साल के बाद ही पात्रता मिल सकती है।
पहली बार गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स—जैसे फूड डिलीवरी एजेंट और ऐप-आधारित ड्राइवर—को कानूनी पहचान दी गई है। उनके लिए सोशल सिक्योरिटी फंड बनाया जाएगा, जिसमें एग्रीगेटर कंपनियां योगदान देंगी।
4. Occupational Safety Code: काम के घंटे और सुरक्षा
इस कोड के तहत हफ्ते में अधिकतम 48 घंटे काम तय है। कंपनियां चाहें तो 4 दिन काम और 3 दिन छुट्टी का मॉडल अपना सकती हैं, बशर्ते कुल घंटे 48 से ज्यादा न हों।
ओवरटाइम डबल रेट पर देना होगा और कर्मचारी की सहमति जरूरी होगी। महिलाओं को नाइट शिफ्ट में काम की अनुमति दी जा सकती है, लेकिन सुरक्षा और सहमति अनिवार्य होगी।
फुल एंड फाइनल सेटलमेंट नौकरी छोड़ने के 2 दिन के भीतर करना होगा और ग्रेचुटी 30 दिन के अंदर देनी होगी।
कंपनियों और कर्मचारियों पर असर
कंपनियों के लिए नियम सरल होंगे और रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया एकीकृत हो सकती है। वहीं कर्मचारियों के लिए वेतन संरचना पारदर्शी होगी। हालांकि कुछ लोगों को शुरुआत में टेक-होम सैलरी में बदलाव महसूस हो सकता है।
New Labour Code का उद्देश्य है—श्रमिकों की सुरक्षा बढ़ाना और उद्योगों को अधिक लचीला बनाना। यह संतुलन कितना सफल होगा, यह इसके पूर्ण क्रियान्वयन के बाद ही स्पष्ट होगा।
कर्मचारियों को क्या करना चाहिए?
New Labour Code लागू होने के बाद आपको अपनी सैलरी स्लिप ध्यान से देखनी चाहिए। यह जांचें कि बेसिक पे 50% है या नहीं। PF कितना कट रहा है, ग्रेचुटी पॉलिसी क्या है और कंपनी के नियम नए कानून के अनुसार अपडेट हुए हैं या नहीं—इन सब पर नजर रखना जरूरी है।
इन-हैंड सैलरी थोड़ी कम हो सकती है, लेकिन यह पैसा आपके भविष्य के लिए सुरक्षित रहेगा। लंबी अवधि में PF और ग्रेचुटी का बढ़ा हुआ लाभ आपके लिए फायदेमंद साबित हो सकता है।
FAQ – New Labour Code
New Labour Code क्या है?
यह 29 पुराने श्रम कानूनों को मिलाकर बनाए गए 4 नए कोड हैं, जो सैलरी, नौकरी सुरक्षा, सामाजिक सुरक्षा और कार्यस्थल नियम तय करते हैं।
क्या New Labour Code 1 अप्रैल 2026 से लागू होगा?
सरकार की ओर से लागू करने की चर्चा 1 अप्रैल 2026 को लेकर रही है, लेकिन अंतिम अधिसूचना राज्यों की तैयारी पर निर्भर करेगी। आधिकारिक नोटिफिकेशन देखना जरूरी है।
नया श्रम संहिता लागू होने पर क्या इन-हैंड सैलरी कम हो जाएगी?
संभव है। क्योंकि बेसिक पे 50% होने से PF ज्यादा कटेगा। हालांकि रिटायरमेंट फंड बढ़ेगा।
नया श्रम कानून मे 50% बेसिक पे नियम क्या है?
कुल सैलरी (CTC) का कम से कम 50% हिस्सा बेसिक पे होना जरूरी होगा।
नया श्रम कानून लागू होने पर PF पर क्या असर पड़ेगा?
नया श्रम कानून लागू होने पर बेसिक बढ़ने से PF योगदान बढ़ सकता है, जिससे भविष्य में बड़ा फंड बनेगा।
नया श्रम कानून लागू होने पर क्या 4 दिन काम और 3 दिन छुट्टी का नियम लागू होगा?
नया श्रम कानून लागू होने पर कुल 48 घंटे साप्ताहिक काम तय है। कंपनियां चाहें तो 4 दिन वाला मॉडल अपना सकती हैं।
फिक्स्ड टर्म कर्मचारियों को ग्रेचुटी मिलेगी?
हाँ, एक साल की सेवा के बाद पात्रता मिल सकती है।
नया श्रम कानून लागू होने पर सैलरी कब तक देना जरूरी होगा?
नया श्रम कानून लागू होने पर अगले महीने की 7 तारीख तक वेतन देना अनिवार्य होगा।
ओवरटाइम का नियम क्या है?
ओवरटाइम डबल रेट पर और कर्मचारी की सहमति से देना होगा।
नया श्रम कानून लागू होने पर नौकरी छोड़ने पर फुल एंड फाइनल कब मिलेगा?
नया श्रम कानून लागू होने पर नौकरी छोड़ने के 2 दिन के भीतर सेटलमेंट करना अनिवार्य होगा।

