UP smart meter new rules 2026: उत्तर प्रदेश के करोड़ों बिजली उपभोक्ताओं के लिए एक बहुत बड़ी खुशखबरी सामने आई है। लंबे समय से चल रहे विवाद और स्मार्ट मीटर को लेकर बनी असमंजस की स्थिति पर अब विराम लग गया है। केंद्र सरकार और उत्तर प्रदेश पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (UPPCL) ने मिलकर उपभोक्ताओं के हक में एक बड़ा फैसला सुनाया है। अब किसी भी बिजली उपभोक्ता पर ‘प्रीपेड स्मार्ट मीटर’ लगवाने के लिए कोई दबाव नहीं डाला जाएगा। अब यह पूरी तरह आपकी मर्जी पर निर्भर करेगा कि आप अपने घर में किस तरह का मीटर और बिलिंग सिस्टम रखना चाहते हैं।
इस महत्वपूर्ण बैठक में कौन-कौन शामिल थे?
इस बड़े फैसले को अमलीजामा पहनाने के लिए नई दिल्ली और लखनऊ में उच्च स्तरीय बैठकें हुईं। इस नीतिगत बदलाव को मंजूरी देने वाली मुख्य टीम में केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (CEA) के वरिष्ठ अधिकारी, उत्तर प्रदेश के ऊर्जा मंत्री शर्मा जी, और यूपी पावर कॉर्पोरेशन (UPPCL) के चेयरमैन शामिल थे। साथ ही, इस बैठक में ‘राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद’ के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने उपभोक्ताओं का पक्ष मजबूती से रखा। परिषद ने उन हजारों शिकायतों का ब्यौरा पेश किया जिनमें उपभोक्ताओं ने बिना बताए बिजली कटने और जबरन प्रीपेड मीटर थोपने की बात कही थी। इन सभी अधिकारियों और जन प्रतिनिधियों की आपसी सहमति के बाद ही इस राहत भरे फैसले पर मुहर लगाई गई।
स्मार्ट मीटर के नियमों में क्या हुआ बदलाव?
बिजली विभाग ने अपने पुराने नियमों में सुधार करते हुए अब ‘प्रीपेड’ सिस्टम की अनिवार्यता को खत्म कर दिया है। पहले यह नियम बनाया गया था कि जहाँ भी नए स्मार्ट मीटर लगेंगे, उन्हें केवल रिचार्ज (प्रीपेड) मोड पर ही चलाया जाएगा। लेकिन जनता की परेशानियों और भारी विरोध को देखते हुए सरकार ने अब विकल्प खुला छोड़ दिया है। अब स्मार्ट मीटर तो लगाए जाएंगे क्योंकि वे तकनीक का हिस्सा हैं, लेकिन उसे प्रीपेड रखना है या पहले की तरह महीने के अंत में बिल भरना (पोस्टपेड) है, इसका फैसला अब उपभोक्ता खुद करेंगे। बिना आपकी लिखित सहमति के विभाग आपके मीटर को प्रीपेड मोड पर नहीं डाल पाएगा।

प्रीपेड और पोस्टपेड का क्या है पूरा मामला?
सरल शब्दों में कहें तो अब आपके पास दो विकल्प होंगे। पहला है पोस्टपेड विकल्प, जिसमें आप पूरे महीने बिजली इस्तेमाल करेंगे और महीने के अंत में आपके पास बिल आएगा। जिसे आप 15 दिनों के अंदर जमा कर सकते हैं। दूसरा है प्रीपेड विकल्प, जो मोबाइल रिचार्ज की तरह काम करता है। इसमें आपको पहले पैसे डालने होंगे और बैलेंस खत्म होते ही बिजली कट जाएगी। बहुत से लोग, खासकर दिहाड़ी मजदूर और मध्यम वर्गीय परिवार, एक साथ बड़ा रिचार्ज नहीं कर पाते थे, इसीलिए वे पोस्टपेड विकल्प की मांग कर रहे थे। अब सरकार ने उनकी यह मांग मान ली है।
उपभोक्ताओं को कैसे मिलेगी राहत? UP smart meter new rules 2026
सरकार के इस फैसले से अब उन लोगों को राहत मिलेगी जिन्हें डर था कि रात-बेरात बैलेंस खत्म होने पर उनके घर का अंधेरा हो जाएगा। अब अगर आपके घर में स्मार्ट मीटर लगता भी है, तो आप विभाग को लिखकर दे सकते हैं कि आपको ‘पोस्टपेड’ सेवा ही चाहिए। इससे न तो आपकी बिजली अचानक कटेगी और न ही आपको बार-बार रिचार्ज की टेंशन होगी। इसके अलावा, बिजली विभाग अब गड़बड़ बिलों को सुधारने के लिए ‘चेक मीटर’ की सुविधा भी देगा। अगर आपको लगता है कि नया मीटर तेज चल रहा है, तो आप शिकायत कर उसकी जांच करवा सकते हैं।
हमारे हिसाब से उत्तर प्रदेश सरकार का यह कदम बिजली उपभोक्ताओं के लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा करने वाला है। तकनीक जरूरी है, लेकिन वह लोगों की सुविधा के लिए होनी चाहिए न कि परेशानी के लिए। अब जब स्मार्ट मीटर की जोर-जबरदस्ती खत्म हो गई है, तो उपभोक्ता अपनी आर्थिक स्थिति और सुविधा के हिसाब से सही चुनाव कर सकेंगे। यह फैसला पारदर्शिता लाने के साथ-साथ आम जनता और बिजली विभाग के बीच भरोसे को भी मजबूत करेगा।
