Budget 2026 आते ही सबसे ज़्यादा चर्चा अगर किसी वर्ग में हुई है, तो वह है शराब पीने वाले, सिगरेट पीने वाले और गुटखा-तंबाकू का सेवन करने वाले लोग। इस बार के बजट में सरकार ने साफ संकेत दे दिया है कि अब नशे से जुड़ी चीज़ों पर टैक्स और सख्ती और बढ़ेगी। सरकार का तर्क है कि इससे न सिर्फ राजस्व बढ़ेगा, बल्कि लोगों को इन हानिकारक आदतों से दूर रहने के लिए मजबूर भी किया जा सकेगा।
लेकिन ज़मीनी हकीकत यह है कि Budget 2026 के बाद दारू, सिगरेट और गुटखा पहले से कहीं ज़्यादा महंगे हो गए हैं। इसका सीधा असर आम उपभोक्ताओं की जेब पर पड़ने वाला है। जो चीज़ें पहले “रोज़मर्रा की आदत” बन चुकी थीं, अब वही आदतें आर्थिक बोझ में बदलती दिख रही हैं।
Budget 2026 में सरकार ने क्या बदला?
Budget 2026 में सरकार ने Excise Duty, GST Compensation Cess और Health Cess जैसे टैक्स को बढ़ाकर नशे से जुड़ी वस्तुओं को महंगा कर दिया है। खास तौर पर शराब, सिगरेट और गुटखा जैसे उत्पादों को “sin goods” की श्रेणी में रखकर उन पर अतिरिक्त टैक्स लगाया गया है।
सरकार का कहना है कि इन उत्पादों के कारण देश में स्वास्थ्य खर्च लगातार बढ़ रहा है। कैंसर, लिवर डिजीज़, हार्ट प्रॉब्लम और अन्य बीमारियों का बड़ा कारण यही नशे की आदतें हैं। Budget 2026 में इनसे होने वाले नुकसान को देखते हुए टैक्स बढ़ाना सरकार की स्वास्थ्य नीति का हिस्सा बताया जा रहा है।
दारू पर Budget 2026 का असर
Budget 2026 के बाद शराब की कीमतों में सबसे ज़्यादा बढ़ोतरी देखने को मिली है। चाहे देसी शराब हो या विदेशी ब्रांडेड शराब, लगभग हर कैटेगरी महंगी हो गई है। राज्य सरकारों के एक्साइज टैक्स और केंद्र सरकार की नीतियों के कारण दारू अब पहले जैसी सस्ती नहीं रही।
पहले जो लोग हफ्ते में एक-दो बार शराब पी लेते थे, अब उन्हें हर बोतल पर ज़्यादा पैसे चुकाने पड़ रहे हैं। इससे खासकर मध्यम और निम्न आय वर्ग पर सीधा असर पड़ा है। कई जगहों पर तो शराब की कीमतें इतनी बढ़ गई हैं कि लोग खपत कम करने या सस्ते विकल्प ढूँढने लगे हैं।
आम आदमी पर क्या असर पड़ेगा?
दारू, सिगरेट और गुटखा का सेवन करने वाला आम आदमी अब महीने के खर्च का हिसाब दोबारा लगाने को मजबूर हो गया है। पहले जो खर्च “छोटा” लगता था, अब वही खर्च साल के अंत तक एक बड़ी रकम बन जाता है।
जो लोग रोज़ सिगरेट पीते हैं या नियमित रूप से शराब का सेवन करते हैं, उनके लिए Budget 2026 के बाद खर्च में सीधी बढ़ोतरी साफ दिख रही है। इसका असर सिर्फ जेब पर नहीं, बल्कि परिवार की आर्थिक योजना पर भी पड़ रहा है।
आपकी जेब से साल में कितना ज़्यादा जाएगा?
अब एक आसान उदाहरण से समझते हैं कि Budget 2026 का असर आपकी जेब पर कितना पड़ सकता है।
मान लीजिए कोई व्यक्ति:
रोज़ 1 पैकेट सिगरेट पीता है
हफ्ते में 2 बार शराब पीता है
Budget 2025 में अनुमानित खर्च:
सिगरेट: ₹200 × 30 दिन = ₹6,000 / महीना
शराब: ₹700 × 8 बोतल = ₹5,600 / महीना
कुल = ₹11,600 / महीना
Budget 2026 के बाद:
सिगरेट: ₹270 × 30 = ₹8,100 / महीना
शराब: ₹900 × 8 = ₹7,200 / महीना
कुल = ₹15,300 / महीना
मासिक अतिरिक्त खर्च = ₹3,700
सालाना अतिरिक्त बोझ = लगभग ₹44,000
यानी सिर्फ टैक्स बढ़ने से एक साल में आपकी जेब से ₹40–45 हज़ार ज़्यादा निकल सकते हैं।
दारू, सिगरेट और गुटखा पर टैक्स क्यों बढ़ाया गया?
सरकार का साफ कहना है कि यह कदम सिर्फ राजस्व बढ़ाने के लिए नहीं है। दारू, सिगरेट और गुटखा से जुड़ी बीमारियों पर सरकार हर साल हजारों करोड़ रुपये खर्च करती है। Budget 2026 में इन उत्पादों पर टैक्स बढ़ाकर सरकार:
- स्वास्थ्य खर्च की भरपाई करना चाहती है
- लोगों को नशे से दूर रहने के लिए प्रेरित करना चाहती है
- युवाओं में बढ़ती लत को रोकना चाहती है
सरकार के अनुसार, अगर खपत कम होगी तो लंबे समय में समाज और अर्थव्यवस्था दोनों को फायदा होगा।
क्या आगे और सख्ती संभव है?
Budget 2026 सिर्फ एक शुरुआत मानी जा रही है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि आने वाले वर्षों में सरकार नशे से जुड़ी चीज़ों पर और सख्ती कर सकती है। इसका मतलब यह है कि दारू, सिगरेट और गुटखा भविष्य में और महंगे हो सकते हैं।
जो लोग अभी से अपनी आदतों पर नियंत्रण नहीं करेंगे, उनके लिए आगे की राह और मुश्किल हो सकती है।
